मंत्र का अर्थ
मंत्र संस्कृत की “मन” धातु से बना है, जिसका अर्थ है मनन या चिंतन।
जो ध्वनि मन को नियंत्रित करे और चेतना को ऊँचा उठाए, वही मंत्र कहलाता है।
मंत्र का वैदिक स्वरूप
वैदिक परंपरा में मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि विशेष ध्वनि-रचना माने गए हैं।
इनका उच्चारण निश्चित स्वर, मात्रा और क्रम के साथ किया जाता है।
मंत्र का उद्देश्य
मंत्र का उद्देश्य मानसिक शुद्धि, एकाग्रता और आत्मिक उन्नति है।
यह बाहरी पूजा से अधिक आंतरिक साधना का साधन है।
मंत्र और ध्वनि विज्ञान
वैदिक ऋषियों ने ध्वनि के प्रभाव को समझकर मंत्रों की रचना की।
ध्वनि-तरंगों का मन और वातावरण पर प्रभाव मंत्र-साधना का आधार है।