अग्नि का वैदिक परिचय
अग्नि वैदिक परंपरा में केवल अग्नि तत्व नहीं, बल्कि एक देवता के रूप में प्रतिष्ठित है।
ऋग्वेद का पहला मंत्र ही अग्नि की स्तुति से प्रारंभ होता है।
अग्नि का प्रतीकात्मक अर्थ
अग्नि ज्ञान, ऊर्जा और परिवर्तन का प्रतीक है।
वह स्थूल पदार्थ को सूक्ष्म बनाकर देवताओं तक पहुँचाने वाला माध्यम मानी जाती है।
यज्ञ में अग्नि की भूमिका
यज्ञ में अग्नि को साक्षी माना गया है।
आहुतियाँ अग्नि के माध्यम से ही देवताओं तक पहुँचती हैं, इसीलिए अग्नि को यज्ञ का केंद्र कहा गया है।
ग्रंथ संदर्भ
ऋग्वेद, यजुर्वेद तथा ब्राह्मण ग्रंथों में अग्नि की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है।